अपने दिल से निबाह कर आये
सबसे रिश्ता तबाह कर आये
चाँद से कब कहा मिलो हमको
चाह करना था चाह कर आये
दर्द शायर ने सुनाया था अभी
लोग भी वाह वाह कर आये
छत कभी दे न सके थे जिनको
हम हथेली की छांह कर आये
ऐसा ज़ज्बात ने भटकाया हमें
अपना चेहरा सिआह कर आये
सोच कर कुछ नहीं हुआ हमसे
जो किया ख्वामख्वाह कर आये
रोज कुछ कम हुई लबों पे हंसी
लोग कैसा गुनाह कर आये
फ़ितरतन दिल फ़कीर होता है
ये जिसे बादशाह कर आये
'एकता-विविधता भारत के डीएनए में है', मैडिसन स्क्वायर में बोले मोहन भागवत
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मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस
सेलिब्रेशन’ को संबोधित करते हुए कहा कि एकता और विविधता भारत के डीएनए में
है. उन्होंन...
4 हफ़्ते पहले