ज़रा आसां ज़रा मुश्किल लगा था
वो हर सूरत में मेरे क़ाबिल लगा था
वो कुरबत में बहुत मासूम निकला
जो सबको दूर से क़ातिल लगा था
हवा, सूरज, ज़मीं थे साथ अपने
मै अपने से बड़ा गाफ़िल लगा था
हमें घर लौट कर राहत अभी है
सफ़र में भी हमारा दिल लगा था
पहुँच के भी कहीं पहुंचे नहीं हम
सफ़र जो था वही मंजिल लगा था
मेरा उससे कोई रिश्ता न निकला
कभी जो रूह में शामिल लगा था
वहीँ एक नींद सो कर लौट आये
नदी के साथ जो साहिल लगा था
'एकता-विविधता भारत के डीएनए में है', मैडिसन स्क्वायर में बोले मोहन भागवत
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मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस
सेलिब्रेशन’ को संबोधित करते हुए कहा कि एकता और विविधता भारत के डीएनए में
है. उन्होंन...
4 हफ़्ते पहले